Childhood Memories

पता ही न चला

कब उंगली पकडे पकडे हाथ छोड़ कर भागने लगा पता ही न चला कब जिंदगी को सुलझाते सुलझाते खुद उलझ गया पता ही न चला रिस्ते बहुत नाजुक थे उन्हें जीवन भर एक डोर में भांदे रखना था कब वो डोर कमजोर पड़ ग

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क्या कहूँ

क्या कहूँ

मैं खुद में खो चुका हूँ तुमसे क्या आकर कहूँ मैं खुद में ढल चूका हूँ तुमसे क्या शिकायत करूँ तू सूरज की तरह चमक चुकी है तू हवा की तरह चलने लगी है तू तेज है पानी की तरह तू रौशनी है आग की त

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badalta zamana

बदलता जमाना

वक़्त है आज गुजर जायेगा तेरा साथ है एक दिन छूट जायेगा बदलेगा जमाना तू भी बदल जायेगा वक़्त है आज गुजर जायेगा तू आज साथ है मै बड़ा जो हूँ कल मैं छोटा होंगा तू भी बदल जायेगा बदलेगा जमाना तू

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