waqt-badal-raha-hai

Waqt badal raha hai

Waqt badal raha hai Jo kal tha ya jo kal hoga Wo aaj nahi hai Waqt badal raha hai Ye duniya hai Is duniya mai wahi izzat pata hai Jo kuch kerke dikhata hai Waqt badal raha hai Jo kal tha ya

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child within you

Poem for self – a children day poem

  अपने अंदर के बच्चे को ना खो देना तुम, इन रीति रिवाज़ों में इन तीज त्योहारो में इन दुनिया की रस्मो मैं मीठे वादों में अपने अंदर के बच्चे को ना खो देना तुम, शहर की चखा चौन्द मैं गा

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badalta zamana

बदलता जमाना

वक़्त है आज गुजर जायेगा तेरा साथ है एक दिन छूट जायेगा बदलेगा जमाना तू भी बदल जायेगा वक़्त है आज गुजर जायेगा तू आज साथ है मै बड़ा जो हूँ कल मैं छोटा होंगा तू भी बदल जायेगा बदलेगा जमाना तू

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Think about yourself

Tu duniya ki chinta chhordh de

​तू दुनिया की चिंता छोड़ छोड़ दे तू, बस नीचे गिरता जाएगा तू दुनिया की चिंता छोड़ दे अपने लक्ष्य से डग मगा जायगा तू दुनिया की चिंता छोड़ ये सबसे दुखी है तू तो इंसान है ये तो भगवान से भी दुखी

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Duniya Ke nirale Khel

Duniya ke nirale khel

Sambhal ja Tu Ruk ja Tu tham jaa Ye duniya ke khel nirale hai Ye duniya ke dastoor anjaane hai Ye duniya hai katputli ki Ye duniya hai deewano ki Is duniya mai log hai bhati bhati Is dun

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Bheedh Hai Bheedh Main Kho Jaane do!

भीड है भीड मे खो जाने दो

  भीड है भीड मे खो जाने दो. कुछ अपना सा हो जाने दो. तनहा हूँ मैं , तनहा हो जाने दो. एक बस मकसद है , पूरा हो जाने दो. भीड मे मुझे खो जाने दो वो बड़  रहा है , उसे बड़ने दो. उससे मुझे कुछ

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