child within you

Poem for self – a children day poem

  अपने अंदर के बच्चे को ना खो देना तुम, इन रीति रिवाज़ों में इन तीज त्योहारो में इन दुनि

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Childhood Memories

पता ही न चला

कब उंगली पकडे पकडे हाथ छोड़ कर भागने लगा पता ही न चला कब जिंदगी को सुलझाते सुलझाते खुद उलझ गया

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